अमृत समान अनेक गुण वाली गिलोय (गुडूची)

अमृत समान अनेक गुण वाली गिलोय (गुडूची)

हमारे देश में नाना प्रकार की जड़ी बूटियां और वनस्पतियां उपbब्ध हैं और प्रत्येक जड़ी बूटी किसी न किसी हेतु के bिए उपयोगी होती है । इस स्तम्भ के अन्तर्गत जड़ी बूटियों एवं वनस्पतियों के गुण और उपयोग का विवरण, परिचय सहित प्रकाशित किया जाता है । इस μिकस्त में अमृत के समान औषधीय गुणों से भरपूर “गिbोय’ के बारे में विवरण प्रस्तुत है ।

भाव प्रकाश निघण्टु में लिखा है-

गुडूची कटुका तिक्ता स्वादु पाका रसायनी ।
संग्राहिणी कषायोष्णा लध्वी बल्या
ग्रीदीपिनी।। दोष त्रयामतृड्दाह मेहकासांश्च
पाण्डुताम्। कामला कुष्ठवातास्त्र ज्वर
क्रिमिवमीन्र्हरेत्।।

भाषा भेद से नाम भेद-

संस्कृत -गुडूची। हिन्दी-गिलोय। मराठी-गुलवेल। गुजराती-गलो। बंगला-गुलंच। तैलूगु– तिप्पतोगे। तामिल-शिण्डिलकोडि कन्नड़– गरुड़बेल। पंजाब-गिलो ।कोकण-गरुड़वेल। गोआ-अमृतबेल। करनाटकी-अमरदवल्ली। फारसी-गिलोई। इंगलिश –टिनोस्पोरा (Tinospara).। लैटिन-टिनोस्पोरा कार्डो फोलिया (Tinospara cordifolia).

गुण-

गिलोय कटु, तिक्त व कषाय रस युक्त, विपाक में मधुर रस युक्त, रसायन संग्राही, उष्णवीर्य, लघु, बलदायक, जठराग्री तेज करने वली और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का शमन करने वाली, आम (आंव) प्यास, जलन, प्रमेह, खांसी, एनीमिया, कामला, वात रक्त (गाउट), कुष्ट, ज्वर, क्रिमि आदि व्याधियों को नष्ट करने वाली होती है।

परिचय-

गिलोय की गणना आयुर्वेद ने महत्वपूर्ण, उपयोगी तथा श्रेष्ट औषधियों में की जाती है। इन दस औषधियों में गिलोय इतनी
महत्वपूर्ण और गुणकारी औषधि है कि आयुर्वेदिक ग्रन्थ “भाव प्रकाश निघण्टु’ जड़ी बूटियों का वर्णन करने वाले एक अध्याय का नाम ही गिलोय (गुडूची) के नाम पर “गुडूच्यादि वर्गः’ रखा है। इसके गुणों के आधार पर संस्कृत में इसको कई गुण वाचक नाम दिये गये हैं जैसे मधुपर्ण, अमृता, अमृतवल्रील,कुण्डली, चक्र लक्षणिका, छिन्नरूहा, वत्सादनी, सो वल्ली, जीवन्ती, रसायनी, तन्त्रिका आदि। गिलोय कोई पौधा या वृक्ष के रूप में नहीं बल्कि एक लम्बी बेल के रूप में होती है जो बहुत  लम्बी और वर्षा तक बनी रहती है जो वृक्ष के सहारे से चढ़ती व बढ़ती है।जो गिलोय नीम के वृक्ष पर चढ़ती और रहती है उसे नीम गिलोय कहते हैं। नीम गिलोय औषधि के रूप में सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके पत्ते हृदय के आकार के और लम्बे डण्ठल वाले होते हैं। फूल बारीक पीले रंग के झुण्ड के रूप में होते हैं। फल भी लाल रंग के गुच्छे की तरह होते हैं। इसकी जड़ और काण्ड (तना) को उपयोग में लिया जाता है। विपाक में मधुर होने से शक्ति और आयु बढ़ाने वाली होती है और उष्ण वीर्य होते हुए भी पित्त शामक होती है। रसायन गुण वाली होने से यह सप्त धातुओं को पुष्टि करती है और शरीर को बल देती है। ज्वर और जीर्ण ज्वर (पुराना बुखार) को दूर करने के लिए यह श्रेष्ट औषधि का काम करती है। इसका स्वाद कड़वा होता है।

मात्रा और सेवन विधि-

इसका चूर्ण छोटा आधा चम्मच, पानी के साथ, काढ़ा या ताजा रस आधा कप, गिलोय सत्व के रूप में आधा ग्राम से एक ग्राम मात्रा में पानी के साथ सुबह और शाम को सेवन करना चाहिए।

उपयोग-

ज्वर, जीर्ण ज्वर, मोती ज्वर (टायफाइड) और तीनों दोष का शमन करने के लिए गिलोय का उपयोग सर्वश्रेष्ठ है और निरापद है। जहां तक सम्भव हो गिलोय की ताजी बेल काट कर प्रयोग करना चाहिए। संग्रह करके रखना हो तो ग्रीष्म काल के अन्त और वर्षा शुरू होने से पहले इसे खूब सुखा कर रखना चाहिए इसके ऊपर की छाल हटा कर टुकड़े करके कूट पीस कर या टुकड़े करके संग्रह करना चाहिए। गिलोय का उपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है किसी भी रोग के रोगी की चिकित्सा में किया जा सकता है और किसी भी आयु वाला किसी भी ऋतु में कर सकता है। इसका उपयोग चूर्ण, रस सत्व, काढ़ा, फाण्ट आदि के रूप में अन्य औषधियों के साथ सहायक औषधि या अनुपान के रूप में अधिकतर किया जाता है, केवल गिलोय का अकेला उपयोग बहुत कम होता है। जैसे भूखे व्यक्ति के लिए भोजन करना जरूरी है उसी तरह किसी भी रोग के रोगी के लिए किसी भी ऋतु में, किसी भी आयु में बच्चा, जवान बूढ़ा, गर्भवती या प्रसूता स्त्री के लिए गिलोय का उपयोग जरूरी व हितकारी है। दोषों को सामान्य करना इसकी विशिष्ठ उपयोगिता है अतः धातुओं और वात पित्त आदि दोषों को, उनकी घट-बढ़ को दूर कर उन्हें सम्यक अवस्था में रखना गिलोय की सबसे बड़ी उपयोगिता है। पित्त प्रकोप (एसिडिटी) को शान्त करने में इसका उपयोग बहुत गुणकारी सिद्ध होता है। इसका उपयोग निरोग व्यक्ति भी कर सकता है। कुछ रोगों में इसके उपयोग के बारे में विवरण आप निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर के पा सकते हैं |

Shri Ganga Pharmacy Ads
Shri Ganga Pharmacy Ads
Shri Ganga Pharmacy Ads
Shri Ganga Pharmacy Ads

Header Image

Post source : जड़ी बूटी परिचय माला

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *