अपच से निजात पाने के घरेलू उपाय

अपच से निजात पाने के घरेलू उपाय

ग्रीष्म ऋतु में, पाचन शक्ति शीत ऋतु के समय जैसी नहीं रहती जिससे पाचनक्रिया ठीक से काम नहीं कर पाती और इसी वजह से कई व्यक्ति ग्रीष्म ऋतु में अपच से पीड़ित रहते हैं। ऐसे व्यक्ति मनचाहा स्वादिष्ट व्यंजन नहीं खा पाते। अपच के कारण कब्ज, पेट
साफ न होना, भूख की कमी या भूख न लगना, वात एवं पित्त के प्रकोप, आध्मान, अफारा और उदरशूल आदि व्याधियों से पीड़ित हुआ करते हैं। ऐसे व्यक्तियों के उपयोग के लिए भोजन से पहले और भोजन के बाद प्रयोग करने योग्य गुणकारी प्रयोग प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

भोजन के पहले-

सेन्धानमक, कालानमक, सफेद जीरा भुना हुआ और काली मिर्च- चारों 50-50 ग्राम लेकर अलग-अलग कूट पीस कर खूब महीन चूर्ण करके, अच्छी तरह मिलाने के लिए छन्नी से तीन बार छान कर ढक्कनदार एयरटाइट शीशी में भर लें। एक गांठ अदरक का रस निकाल कर, इस रस की मात्रा के बराबर नींबू का ताज़ा रस निकाल कर दोनों को एक कप में डाल कर, स्वाद के अनुसार मात्रा में, शीशी का चूर्ण डाल लें। इसे भोजन करने के आधा घण्टा पहले पी लें।

लाभ-

इस प्रयोग से भूख खुल कर लगेगी, पाचन क्रिया अच्छी होगी, कण्ठ व गले की खराश दूर होगी, अगर टांसिल्स में तकलीफ होगी तो दूर होगी, वात व्याधि का शमन होगा, पेट अच्छा साफ होगा। इस प्रयोग को जितने दिन चाहें कर सकते हैं। कम से कम दो सलाह तो करना ही चाहिए।

भोजन के बाद-

काली मिर्च 4, लौंग 4 और दो चुटकी काला नमक- तीनों को एक कप पानी में डाल कर मन्दी आंच पर रख कर ढक्कन से ढक दें। जब उबलते हुए, पानी आधा कप बचे, तब उतार कर ठण्डा कर लें। इसे सुबह के भोजन के आधे घण्टे बाद, दिन में सिर्फ एक बार 15 दिन तक लगातार सेवन करें। बाद में भी जब चाहें तब तक सेवन कर सक ते हैं।

लाभ-

इस प्रयोग से भोजन के पहले सेवन करने वाले प्रयोग जैसे ही लाभ होते हैं और उस प्रयोग का प्रभाव बढ़ता है। इन दोनों प्रयोगों के सेवन से शरीर का दुबला पतलापन दूर होता है, शरीर भरने bगता है, हीष्ट-पुष्ट और बलीष्टहोता है। यदि लगातार शरीर और स्वास्थ्य की स्थिति ऐसी ही बनी रहे और स्वस्थ दम्पति विशेषांक (अक्टूबर 02) अंक में प्रस्तुत की गई “स्वास्थ्य रक्षक एवं शक्ति वद्र्धक दिनचर्या’ का सख्ती से पालन किया जाए तो पुरुषों के मामले में यह चमत्कार हो सकेगा कि बिना वाजीकारक और यौन शक्तिवद्र्धक औषधियों का सेवन किये ही, प्राकृतिक रूप से, पौरुषबल और यौन शक्ति की समुचित वृद्धि होती रहेगी।

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Post source : स्व. वैद्य कन्हैयालाल शर्मा स्मृति लेखमाला

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