एग्जीमा और उसका घरेलु इलाज

एग्जीमा और उसका घरेलु इलाज

एक्जीमा बड़ा कष्टदायक और जीणॉ (क्रोनिक) रोग है जो वर्षा तक बना रहता है। यह गीला और सूखा दो प्रकार का होता है। इसका एक बहुत ही सफल इलाज करने वाला घरेलू नुस्खा हमें मिला निरोगधाम के एक पाठक श्री जगदीशचन्द्र शर्मा से जिसे हमने पहली बार वर्षा ऋतु (जुलाई 81) अंक में प्रकाशित किया था। पाठकों द्वारा भेजे गये पत्रों से इस नुस्खे की गुणवत्ता सिद्ध होने पर दूसरी बार अक्टूबर 82 अंक में पुनः प्रकाशित किया था। ये दोनों अंक बिक कर समाá हो गये तो इस नुस्खे को अक्टूबर 85 अंक में तीसरी बार प्रकाशित करना पड़ा था। फिर जनवरी 88 अंक और अप्रेb 90 अंक में भी प्रकाशित किया था। अब नये पाठकों के लिए 15 वर्ष बाद पुनः प्रकाशित कर रहे हैं।

नुस्खा-

माजूफल 5 नग, सुपारी 5 नग, करंज के दाने 5 नग, कुचले के दाने 5 नग और सौरही कौड़ी 5 नग। करंज को घिया करंज, डहरकंज, घाणेराकरंज, कांटा करंज आदि नामों से भी पुकारते हैं। करंजी अलग चीज़ है। करंज का तैल निकाला जाता है। सौरही कौड़ी वही है जिससे बच्चे खेला करते हैं। ये सभी पदार्थ, कच्ची देशी जड़ी बूटी बेचने वाली दुकान पर मिल जाते हैं। इन सभी पदार्था को मिट्टी के कुल्हड़ में रख कर कुल्हड़ का मुंह, मिट्टी के ही बने ढक्कन से ढक कर, आटा गूंध कर ढक्कन के चारों तरफ लगा कर दरार बन्द कर दें और आग पर रख दें। जब कुल्हड़ खूब लाल हो जाए तब सावधानी से निकाल कर कुल्हड़ को बिल्कुल ठण्डा कर लें और ढक्कन खोल कर पदार्था की भस्म सम्भाल कर निकाल लें, पीस कर महीन चूर्ण कर लें। अब रस कपूर 20 ग्राम, सफेद खैर, मुर्दाशंख, छोटी इलायची के दाने- तीनों 5-5 ग्राम। इन चारों को खूब महीन पीस कर कपड़ छन कर लें। इस चूर्ण में चमेली का शुद्ध तैल इतनी मात्रा में मिलाएं कि गाढ़ा मल्हम बन जाए। इस मल्हम को रोज़ाना एक्जीमा पर लगाएं। 3-4 दिन में ही लाभ होने लगेगा और एक मास में एक्जीमा जड़ से चला जाएगाऔर निशान तक बाकी नहीं रहेगा। लाभ न होने तक लगाते रहें। एक बात का खयाल रखें। चमेली के तैल का मतलब सिर के बालों में लगाने वाले हेयर आइल से नहीं है। अत्तार, सुगन्धी या विभिन्न प्रकार के इत्र, तैल आदि बेचने वाली दुकान पर चमेली का शुद्ध तैल मिलता है। इस शुद्ध चमेली तैल का ही उपयोग करें। यदि मल्हम को घर पर न बना सकें तो बाज़ार से खरीद लें|

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Post source : स्व. वैद्य कन्हैयालाल शर्मा स्मृति लेखमाला

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