निरोगधाम प्रकाशन द्वारा उपयोगी पुस्तके

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स्वास्थ्य रक्षक

दुनिया में स्वस्थ्य से बढ़ क्र कोई वश्तु नहीं है, एक तंदरुस्ती हजार नेमत है इसलिए सातों सुखों में पहला सुख ” निरोगी काया” का होना मन गया है| जबतक हम मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं होंगे तब संसार के किसी भी सुख का अनुभव न ले सकेंगे क्योकि सुख का अनुभव और आनंद तभी लिया जा सकता है जब हम मानसिक और शारीरिक रुप से ऐसी स्तिथि में हों की सुख के आनंद का उपभोग क्र सकें| ऐसी स्तिथि को उपलब्ध करने के लिए हमें हमारे स्वस्थ्य की रक्षा करनी होगी| यह रक्षा कैसे की जा सकती है इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए  एस पुस्तक को पढ़िए, बार बार पढ़िए पढ़ कर मन , वचन , कर्म से पुस्तक में दिए गए परामर्श पर आचरण कीजिये |

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योग संग्रहbookUpload2

इस आयुर्वेदिक योग संग्रह को हार्दिक स्नेह और शुभकामनाओं के साथ, उन सभी पाठक – पाठिकाओ की सेवा में समर्पित कर रहा हूं जो आयुर्वेद शास्त्र के प्रति आस्था रखते हैं और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अपनाना चाहते हैं | इस पुस्तक में, आयुर्वेद शास्त्र के अत्यंत गुणकारी लाभकारी सिद्ध होने वाले चुने हुए उत्तम योग, जनकल्याण की कामना से, अपनी भाषा और शैली में लिख कर, प्रस्तुत किये हैं | इस योग संग्रह द्वारादेशवासी आयुर्वेद के उत्तम आयुर्वेदिक योग से परिचित होंगे और आवश्यता के अनुसार इनका सेवन कर लाभ उठाएगे, एस कामना के साथ यह प्रस्तुति आपको सदर समर्पित है | 

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स्वस्थ्य रक्षक घरेलू नुस्खे bookUpload3

कोई दुखी नहीं होना चाहता, फिर भी होता है | कोई रोगी होना नहीं चाहता, फिर भी होता है | यदि मनुष्य आचार – विचार ठीक रखे तो दु:खी न हो और आहार विहार ठीक रखे तो रोगी न हो पर कई कारणों से मनुष्य न तो उचित आचार विचार रख पता है और न ही आहार विहार ही ठीक रख है लिहाजा दु:खी भी होता है और रोगी भी | दुःख से दु:खी बना रहना या रोग से रोगी बना रहना उचित नहीं बल्कि इनसे मुक्त होने का प्रयत्न किये जाने चाहिए| ऐसे प्रयत्नों से अपना योगदान देने के लिए मैं यह पुस्तक उन सभी भाई – बहनों की सेवा में हार्दिक  स्नेह और शुभकामनाओं के साथ समर्पित कर रहा हु जिन्हें इस पुस्तक की आवश्यकता है |

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